दशहरा, जिसे विजयदशमी के रूप में भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति और धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है, जब भगवान राम ने रावण का वध किया और माँ दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की। इस पर्व का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी है, जो व्यक्ति की कुंडली, ग्रहों की स्थिति और उसके जीवन में आने वाली बाधाओं पर गहरा प्रभाव डालता है। दशहरे का ज्योतिषीय महत्व: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दशहरे के दिन ग्रहों की स्थिति में विशेष परिवर्तन होते हैं, जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुरे ग्रहों का प्रभाव हो, तो इस दिन की पूजा से उसे शुभ फल प्राप्त होते हैं। खासकर जिनकी जन्मकुंडली में शनि, राहु और केतु का दोष होता है, उन्हें इस दिन माँ दुर्गा की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। इस दिन माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विशेष महत्व है। इन नौ रूपों को समझना और उनकी पूजा करना जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलन और सफलता लाने में सहायक होता है। माँ दुर्गा के नौ रूप और ज्योतिषीय प्रभाव: शैलपुत्री माँ दुर्गा का पहला रूप...